दिल्ली जंतर-मंतर में आदिवासी हो समाज का धरना प्रदर्शन

"हो" भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग, देशभर के आदिवासी 8 अगस्त को दिल्ली पहुंचेंगे

दिल्ली जंतर-मंतर में आदिवासी हो समाज का धरना प्रदर्शन

कोलकाता: "हो" भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर आदिवासी हो समाज ने आंदोलन को तेज कर दिया है. देशभर के आदिवासी हो समाज के लोग एक मंच में आकर अपनी मांगों से केंद्र सरकार को अवगत करायेंगे. वे अपनी मांगों को लेकर 8 अगस्त 2022 को दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन भी करेंगे. ऑल इंडिया हो लैंग्वेज एक्शन कमिटी राष्ट्रीय सचिव सुरा बिरुली ने जमशेदपुर में आयोजन एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि आदिवासी हो समाज लंबे समय से हो भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर आंदोलन करता रहा है. लेकिन केंद्र सरकार ने इस भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने का आश्वासन के अलावे कुछ नहीं दिया. इसलिए अब आदिवासी हो समाज ने अपनी मांगों को लेकर आर-पार लडाई का फैसला लिया है. प्रेसवार्ता में राष्ट्रीय सचिव सुरा बिरुली, भाषा आंदोलनकारी मोसो सोय,हो महासभा सचिव दुर्गा चरण बारी,विश्वजीत लागुरी,  मनोरंजन हेमब्रोम,राजेश सिंकु,मोतीलाल सिंकु, सुरजा पूरती,बयान लागुरी,निशांत बिरुवा, कृष्णा चंद्रा पूरती,मथुरा बिरूवा आदि थे।

देशभर के आदिवासियों का होगा जुटान

रविवार की शाम तक झारखंड समेत पश्चिम बंगाल, ओड़िशा, बिहार, छत्तीसगढ़, असम आदि राज्यों से हजारों की संख्या में लोग दिल्ली पहुँचेंगे। ऑल इंडिया हो लैंग्वेज एक्शन कमेटी के राष्ट्रीय सचिव सुरा बिरुली ने बताया कि धरना-प्रदर्शन शांति पूर्वक तरीके से किया जायेगा। "हो" भाषा आंदोलन देश भर के 48 संगठनों की अगुवाई में किया जा रहा है। 8 अगस्त को धरना प्रदर्शन के बाद राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री व गृहमंत्री कार्यालय को मांग पत्र सौंपा जायेगा।

केंद्र व राज्य ने मामले को ठंडे बस्ते में डालने का काम किया

सुरा बिरूली ने कहा कि हो भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग को लंबे समय से लड़ाई लड़ी जा रही है, बावजूद इसके केंद्र व राज्य ने "हो" समुदाय की मातृभाषा को ठंडे बस्ते में डालने का काम किया. अब देश के बड़े पैमाने पर भाषा आंदोलन की मुहिम तेज हो चुकी है. अब यह आंदोलन "हो" भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल होने के बाद ही थमेगा।