देश की पहली आदिवासी राष्ट्रपति बनीं द्रौपदी मुर्मू

राष्ट्रपति चुनाव के नतीजे आ चुके हैं। कुल चार राउंड की गिनती के बाद जो आंकड़े जारी हुए हैं, उनमें एनडीए की ओर से उम्मीदवार बनाई गईं द्रौपदी मुर्मू ने जीत हासिल की।

देश की पहली आदिवासी राष्ट्रपति बनीं द्रौपदी मुर्मू

राष्ट्रपति चुनाव के नतीजे आ चुके हैं। कुल चार राउंड की गिनती के बाद जो आंकड़े जारी हुए हैं, उनमें एनडीए की ओर से उम्मीदवार बनाई गईं द्रौपदी मुर्मू ने जीत हासिल की। जहां मुर्मू को इस चुनाव में कुल 2824 प्रथम वरीयता के वोट मिले, वहीं यशवंत सिन्हा को 1877 प्रथम वरीयता वोट मिले। इस आधार पर मुर्मू 6 लाख 76 हजार 803 वैल्यू के बराबर वोट जुटाने में सफल रहीं, जबकि यशवंत सिन्हा महज 3 लाख 80 हजार 177 वोट ही हासिल कर सके। जहां सांसदों के वोटों की गिनती पूरी होने के बाद पहले राउंड के नतीजे घोषित हुए थे, वहीं आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़ समेत 10 राज्यों के विधायकों के वोटों की गिनती के बाद दूसरे चरण के नतीजे घोषित हुए। तीसरे राउंड के अंत तक ही द्रौपदी मुर्मू ने 5,77,777 वोट हासिल कर निर्णायक बढ़त हासिल कर ली थी। लेकिन चौथे राउंड में यशवंत सिन्हा को द्रौपदी मुर्मू से ज्यादा वोट मिले। हालांकि, इस राउंड में ज्यादा वैल्यू वोट हासिल करने के बावजूद उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा। ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर हर राउंड में मतगणना के बाद नतीजे क्या रहे? क्यों चौथे राउंड में जीत का बड़ा अंतर रखने के बाद यशवंत सिन्हा को द्रौपदी मुर्मू के खिलाफ शिकस्त झेलनी पड़ी? यशवंत सिन्हा और द्रौपदी मुर्मू के समर्थन के आंकड़े क्या रहे?

पहला राउंड- सांसदों के वोट के क्या रहे नतीजे

राष्ट्रपति चुनाव में पहले राउंड में सांसदों के वोटों की गिनती की गई। लोकसभा और राज्यसभा को मिलाकर कुल 776 सांसदों के वोट मान्य थे। हालांकि, इनमें 15 मत रद्द हो गए, जबकि कुछ सांसदों ने वोट नहीं डाले थे। कुल 748 सांसदों के 5,23,600 वैल्यू तक के वोट काउंट हुए। इनमें

1. द्रौपदी मुर्मू
• द्रौपदी मुर्मू को मिले: 540 वोट
• इन वोटों की वैल्यू रही: 3,78,000

2. यशवंत सिन्हा
• यशवंत सिन्हा को मिले: 208 वोट
• इन वोटों की वैल्यू रही: 1,45,600

यानी संसद में मुर्मू को 72 फीसदी सांसदों का समर्थन हासिल हुआ है, जबकि यशवंत सिन्हा के लिए सिर्फ 28 फीसदी सांसदों ने ही वोट डाला। यानी इस राउंड में ही मुर्मू को यशवंत सिन्हा पर 232 वोट की बढ़त मिल गई।

दूसरा राउंड: आंध्र से लेकर झारखंड तक की गिनती में क्या?

सांसदों के वोटों की गिनती के बाद चुनाव आयोग ने अल्फाबेटिक ऑर्डर में राज्य की विधानसभाओं से डाले गए वोटों की गिनती शुरू कर दी। यानी आंध्र प्रदेश से लेकर अरुणाचल प्रदेश, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और झारखंड शामिल हैं। दूसरे राउंड के बाद कुल वैध वोट 1138 रहे। इन वोटों की वैल्यू 1,49,575 रही। इनमें

द्रौपदी मुर्मू
• द्रौपदी मुर्मू को मिले 809 वोट
• इनकी वैल्यू 1,05,299

यशवंत सिन्हा 
• यशवंत सिन्हा को मिले 329 वोट
• इन वोटों की वैल्यू 44,276

तीसरा राउंड: कर्नाटक से पंजाब तक क्या रहे नतीजे?

चुनाव आयोग ने अगले 10 राज्यों की गिनती के बाद तीसरे राउंड के नतीजे घोषित किए। इसमें कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, ओडिशा, पंजाब के विधायकों की ओर से डाले गए वोटों और वोट वैल्यू की गणना की गई। तीसरे राउंड में कुल 1,333 वैध वोटों की गिनती हुई। इन वोटों की वैल्यू 1,65,664 रही। इनमें

द्रौपदी मुर्मू
• द्रौपदी मुर्मू को मिले 812 वोट
• इन वोटों की वैल्यू 94,478

यशवंत सिन्हा
• यशवंत सिन्हा को मिले 521 वोट
• इन वोटों की वैल्यू 71,186

चौथा राउंड: राजस्थान से तेलंगाना तक ये आए नतीजे

चौथे और आखिरी राउंड में चुनाव आयोग ने राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, पुडुचेरी, सिक्किम और त्रिपुरा जैसे राज्यों के विधायकों के वोटों की गिनती की। इसमें यशवंत सिन्हा द्रौपदी मुर्मू से आगे रहे। इस राउंड में 2,18,141 वैल्यू के 1482 वैध वोटों की गिनती हुई। इनमें

द्रौपदी मुर्मू
• द्रौपदी मुर्मू को मिले 663 वोट
• इन वोटों की वैल्यू 99,026

यशवंत सिन्हा
• यशवंत सिन्हा को मिले 819 वोट
• इन वोटों की वैल्यू 1,19,115

क्या रहे अंतिम नतीजे?

पहले, दूसरे, तीसरे और चौथे राउंड के चुनावी नतीजों पर गौर किया जाए तो सामने आता है कि कुल 4754 वोट डाले गए और इनमें 4701 वोट वैध पाए गए। 53 वोटों को अवैध करार दिया गया। 
• द्रौपदी मुर्मू को कुल 2824 वोट मिले। इन मतों का मूल्य 6,76,803 रहा। 
• यशवंत सिन्हा को इन चारों राउंड्स में कुल 1,877 वोट्स मिले हैं। इन मतों का मूल्य 3,80,177 है। 

गौरतलब है कि विधायकों और सांसदों के कुल वोट को मिलाकर ‘इलेक्टोरल कॉलेज’ कहा जाता है। यह संख्या 10,86,431 है। इस संख्या के आधे से ज्यादा वोट यानी 5,43,216 मत पाने वाले उम्मीदवार को राष्ट्रपति चुनाव का विजेता घोषित किया गया। 


भाजपा ने जिस दिन राष्ट्रपति पद के लिए अपने उम्मीदवार का ऐलान किया, उसी दिन तय हो गया था कि द्रौपदी मुर्मू देश की दूसरी महिला और पहली आदिवासी राष्ट्रपति बनेंगी. द्रौपदी मुर्मू झारखंड की पहली महिला राज्यपाल रह चुकीं हैं. वह आदिवासी नेता हैं. भाजपा की ओर से घोषित उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू सत्तारूढ़ एनडीए गठबंधन की भी उम्मीदवार थीं. उन्हें कई दलों का समर्थन प्राप्त हुआ. कई राज्यों में उनके पक्ष में क्रॉस वोटिंग भी हुई. महज तीन राउंड की गिनती के बाद ही उन्होंने जीत के लिए जरूरी आंकड़ा हासिल कर लिया. तीसरे राउंड तक की गिनती में उन्हें 5,77,777 वोट मिले, जो जीत के आंकड़े से ज्यादा है.

एनडीए की संयुक्त उम्मीदवार बनीं द्रौपदी मुर्मू

झारखंड की पूर्व राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किया था. भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने उनके नाम का ऐलान किया था. भाजपा संसदीय दल की बैठक के बाद जगत प्रकाश नड्डा ने कहा था कि यूपीए के घटक दलों से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार पर सर्वसम्मति बनाने की कोशिश की गयी, लेकिन यूपीए ने अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया.

आदिवासी को राष्ट्रपति बनाने का फैसला

श्री नड्डा ने कहा कि इसके बाद ही संसदीय दल की बैठक में इस बात का फैसला किया गया कि किसी आदिवासी को इस बार राष्ट्रपति बनाया जाये. इसलिए संसदीय दल ने झारखंड की पूर्व राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू को एनडीए का उम्मीदवार बनाने का फैसला किया. जेपी नड्डा ने कहा कि उनकी पार्टी चाहती थी कि सर्वसम्मति से राष्ट्रपति चुना जाये, लेकिन यूपीए ने इसमें रुचि नहीं ली.

जेपी नड्डा और राजनाथ सिंह ने की अलग-अलग दलों से बात

जगत प्रकाश नड्डा ने कहा कि राजनाथ सिंह और उन्होंने खुद अलग-अलग दलों के साथ राष्ट्रपति के उम्मीदवार के नाम पर चर्चा की. लेकिन, यूपीए ने अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया. इसके बाद भाजपा संसदीय दल ने फैसला किया कि किसी आदिवासी को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया जाये. संसदीय दल ने द्रौपदी मुर्मू को अपना उम्मीदवार बनाने का फैसला किया.

ओड़िशा की शिक्षित नेता रूप में है पहचान

झारखंड की राज्यपाल बनने से पहले द्रौपदी मुर्मू ओड़िशा के रायरंपुर से विधायक रहीं. ओड़िशा में मंत्री भी रहीं. ओड़िशा की एकमात्र महिला नेता हैं, जिसे किसी राज्य में राज्यपाल नियुक्त किया गया. बीजू जनता दल की सरकार में द्रौपदी मुर्मू वाणिज्य और परिवहन तथा मत्स्य पालन एवं पशु संसाधन विकास राज्य मंत्री का कार्यभार संभाल चुकीं हैं.

जनजातीय मामलों को लेकर रहती हैं सजग

द्रौपदी मुर्मू न केवल लो प्रोफाइल राजनेता हैं, बल्कि उनकी छवि बेहद साफ-सुथरी है. किसी कंट्रोवर्सी में कभी नहीं पड़ीं. शिक्षित और बेदाग छवि की वजह से वह भाजपा आलाकमान की पहली पसंद बनीं. बता दें कि द्रौपदी मुर्मू भारतीय जनता पार्टी के सोशल ट्राइब मोर्चा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की सदस्य भी रह चुकीं हैं.द्रौपदी मुर्मू ने झारखंड की पहली महिला राज्यपाल के रूप में 18 मई 2015 को शपथ ली थी. पांच वर्ष का कार्यकाल 18 मई 2020 को पूरा हो गया था, लेकिन कोरोना के कारण राष्ट्रपति द्वारा नयी नियुक्ति नहीं किये जाने के कारण श्रीमती मुर्मू का कार्यकाल का स्वत: विस्तार हो गया. छह वर्ष एक माह 18 दिन का रहा. अपने पूरे कार्यकाल में कभी विवादों में नहीं रहीं. बल्कि हमेशा जनजातीय मामलों, शिक्षा, कानून व्यवस्था, स्वास्थ्य को लेकर सजग रहीं.