विभागीय उदासीनता की वजह से दुवारिया गांव के ग्रामीण डोभा, सिंचाई कुआं व नदी का पानी पीने को मजबूर

गोपीकांदर प्रखंड के टांयजोड़ पंचायत के अन्तर्गत दुवारिया गांव के आदिवासी और पहाड़िया बाहुल्य गांव है. जो प्रखंड मुख्यालय से महज 5 किलोमीटर की दूरी में स्थित है. जहां करीब 110 घर है. इस गांव के तीन टोले हैं.

विभागीय उदासीनता की वजह से दुवारिया गांव के ग्रामीण डोभा, सिंचाई कुआं व नदी का पानी पीने को मजबूर

दुमका : गोपीकांदर प्रखंड के टांयजोड़ पंचायत के अन्तर्गत दुवारिया गांव आदिवासी और पहाड़िया बाहुल्य गांव है. जो प्रखंड मुख्यालय से महज 5 किलोमीटर की दूरी में स्थित है. जहां करीब 110 घर  है. इस गांव के तीन टोले हैं. जिसमें गाडा टोला, ताला टोला और प्रधान टोला आदि प्रमुख है. जिसमें क्रमशः 46,40,24 घर हैं. इस गांव में पीने का पानी की बहुत समस्या है. गांव के ग्रामीण विभागीय और पंचायत राज व्यवस्था में व्याप्त कुव्यवस्था का दंश झेल रहे हैं. व्यवस्था से जुडे लोग गांव की समस्या को जानते हैं, लेकिन उनके ओर से समस्या को समाधान करने की दिशा में कोई पहल नहीं किया गया.

सभी चापाकल हो चुके हैं खराब

दुवारिया गांव के लोगों का कहना है कि गांव में जितने भी चापाकल थे. अब सभी चापाकल खराब हो गये हैं. गांव में करीब 20/25 वर्ष पहले चापाकल लगाया गया था. लेकिन विभाग, पंचायत और ब्लॉक से इसका कभी भी मरम्मतीकरण नही हुआ है. ग्रामीण अब तक अपने पैसो से ही चापाकल का मरम्मतीकरण करते आये हैं. अब चापाकल बहुत पुराना हो गया है, चापाकल के लगे पाइप सड़ गए हैं. जिस कारण ग्रामीण अब चापाकल को मरम्मतीकरण करवाने में असमर्थ है.

बिजली चलित पानी टंकी एक वर्ष से खराब

गाडा टोला में स्थित आंगनबाड़ी केंद्र में बिजली चालित टंकी भी लगा हुआ है. लेकिन वह  करीब एक वर्ष से ख़राब है. ग्रामीणों ने पानी की समस्या को लेकर वार्ड और मुखिया से कई बार शिकायत कर चुके है. लेकिन चापाकल और बिजली पानी का मरम्मतीकरण नहीं कराया गया. ऐसे में ग्रामीणों का कहना है कि वे आखिर करे तो क्या करे. उन्हें दूर-दूर तक अब समाधान का रास्ता भी नहीं दिख रहा है.

डडी, डोभा व नदी का पानी पर हैं आश्रित

चापाकल और बिजली से चलने वाली पानी टंकी खराब होने के बाद गांव के ग्रामीण डडी, डोभा और नदी का पानी पी रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि इन सभी स्रोतों का पानी शुद्ध नहीं है,लेकिन मजबूरी में इन सभी प्रदूषित स्त्रोतों का पानी उपयोग में लाना पड रहा है. उनका कहना है यदि गांव में पीने का पानी के लिए कोई हल नहीं निकाला गया तो आने वाले दिनों में विभिन्न बीमारियों का सामना करना पड सकता है.

टोला वार चापाकलो कि स्थिति

  • खडू सोरेन के घर के सामने का चापाकल करीब एक वर्ष से ख़राब है.
  • होपना हेम्ब्रोम के घर के सामने का चापाकल करीब एक वर्ष से ख़राब है.
  • सपल हांसदा के घर के सामने का चापाकल करीब तीन वर्ष से ख़राब है.
  • विलसन बास्की के घर के सामने का चापाकल करीब दो वर्ष से ख़राब है.
  • प्राथमिक विधालय,दुवरिया का चापाकल करीब एक वर्ष से ख़राब है.
  • आंगनबाड़ी में स्थित बिजली चलित मोटर करीब एक वर्ष से ख़राब है.
  • फूलचंद मड़ैया के घर के सामने का चापाकल ठीक से पानी नहीं दे रहा है.
  • बदरू हेम्ब्रोम के घर के सामने का चापाकल करीब दो वर्ष से ख़राब है.
  • बजल टुडू के घर के सामने का चापाकल मात्र पांच-छ: बाल्टी पानी देता है,उसके बाद बंद हो जाता है.उसके बाद फिर एक घंटा के बाद पांच-छ: बाल्टी पानी देता है.इस चापाकल का पानी बाल्टी में कुछ देर रखने पर लाल हो जाता है.
  • प्रधान टोला में कुल दो चापाकल है.दोनों ही ख़राब है.
  • संग्राम हेम्ब्रोम के घर के सामने का चापाकल करीब तीन वर्ष से ख़राब है.
  • धानेश्वर मरांडी के घर के सामने का चापाकल करीब चार वर्ष से ख़राब है.

विचार-मंथन में ये थे मौजूद

पानी की समस्या को लेकर ग्रामवासियों की एक बैठक हुई. बैठक में बिंदुवार चिंतन-मंथन किया गया. जिसमें मुखी मरांडी,माश्वरी मुर्मू,मंत्री मरांडी,मार्था सोरेन,फुलमुनी हेम्ब्रोम,बाहामुनि हेम्ब्रोम,एलीना मरांडी,शांति मुर्मू,शिवलाल सोरेन,संतोषिनी हेम्ब्रोम,सालोनी बेसरा,लुखी हेम्ब्रोम,एमेल बास्की,होपना हेम्ब्रोम,सनातन बास्की,राजा मरांडी,उर्मिला हेम्ब्रोम आदि उपस्थित थे.