दुमका: आमगाछी पहाड़ गांव पानी,बिजली,सड़कआदि  मूलभूत सुविधाओं से वंचित

मसलिया प्रखंड के सुग्गापहाड़ी पंचायत के अन्तर्गत पहाड़ के ऊपर स्थित पहाड़िया और संताल आदिवासी बाहुल्य आमगाछी पहाड़ गांव में मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव है.

दुमका: आमगाछी पहाड़ गांव पानी,बिजली,सड़कआदि  मूलभूत सुविधाओं से वंचित

दुमका : मसलिया प्रखंड के सुग्गापहाड़ी पंचायत के अन्तर्गत पहाड़ के ऊपर स्थित पहाड़िया और संताल आदिवासी बाहुल्य आमगाछी पहाड़ गांव में मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव है. इस गांव में पांच से अधिक टोला है. इस गांव में करीब 80 घर है. देश आजादी का 75 वर्ष और झारखण्ड राज्य का 22 वर्ष होने के बाद भी इस गांव में बिजली,पानी और सड़क जैसे मूलभूत सुविधाएं नहीं पहुंच सका है.  

(1) बिजली: आपके अधिकार,आपकी सरकार आपके  द्वार कार्यक्रम सुग्गापहाड़ी पंचायत में दुमका के विधायक बसंत सोरेन को ग्रामीणों ने दिसम्बर 2021 को लिखित आवेदन दिया गया था. लेकिन 6 महीना गुजर जाने के बाद जब बिजली नहीं आयी तो यह खबर हाल में मीडिया में प्रमुखता से छपा.जिसके बाद बिजली विभाग ने सिर्फ नोतूनडीह पहाड़िया टोला में ट्रांसफरमर लगाया गया और अन्य टोलों को छोड़ दिया गया है,जिससे ग्रामीण काफी नाराज और आक्रोशित हैं.

(2) पानी : आजादी के इतने वर्ष बीत जाने के बाद भी इस गांव में पीने का पानी के लिये एक भी चापाकल नहीं है. ग्रामीण डोभा,झरना व जर्जर कुआं का प्रदूषित पानी पीने के लिये विवश है. जिस कारण स्वास्थ्य में प्रतिकूल असर पड़ रहा है. ग्रामीणों को पानी लाने के लिए बहुत दिक्कत का सामना पड़ रहा है. पथरीला रास्ता,उपर-नीचे  चढ़ाव भरे रास्ते होकर ग्रामीण पानी लाने के लिये विवश है और गिरने व दुर्घटना का डर भी बना रहता है. ग्रामीणों ने सरकार से पानी का समस्या का समाधान के लिय डीप बोरिंग का मांग किया है.

(3) सड़क: आमगाछी पहाड़ गांव से मुख्य मार्ग रांगा मोड़ की दूरी करीब 5 किलोमीटर है. जो पथरीला और कच्ची है. आमगाछी पहाड़ गांव पहाड़ के पास स्थित है. जो करीब 2.5 किलोमीटर दूर है. गांव के जाने के क्रम में कई पुलिया आते हैं. जिसमे कुछ पुलिया जर्जर हो गयी हैं. बाकि 2.5 किलोमीटर पहाड़ के नीचे से रांगा गांव हो कर मुख्य मार्ग रांगा मोड़ पहुंचता है. यह रास्ता भी पथरीला और कच्चा है.

मरीजों को अस्पताल ले जाने में होती है दिक्कत

 आमगाछी पहाड़ के ग्रामीणों का कहना है कि सड़क नहीं होने के कारण बहुत दिक्कत का सामना करना पड़ता है. गर्भवती महिला, बुजर्गो को स्वास्थ्य केंद्र जाने में बहुत दिक्कत का सामना करना पड़ता है. एम्बुलेस व गाड़ी के लिये 5 किलोमीटर तक खटिया पर या पैदल चल कर रांगा मोड़ जाना पड़ता है. ग्रामीणों का यह भी कहना है कि पीडीएस राशन दुकान से राशन लेने के लिये पहाड़ से नीचे जाना पड़ता है. सड़क मार्ग नहीं होने के कारण उच्च शिक्षा लेने से भी ग्रामीण वंचित हो रहे है. सड़क नहीं होने के कारण ग्रामीणों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ता है. ग्रामीणों का कहना है कि करीब 9 महीने पूर्व सड़क की मांग को लेकर दुमका उपायुक्त कार्यालय में लिखित आवेदन जमा किये थे.आवेदन जमा करने पर विभाग के लोग दो बार गांव जरुर आये थे. लेकिन फिर भी सड़क का निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ. ग्रामीणों का यह भी कहना है कि सड़क निर्माण के लिय एक वर्ष पूर्व मसलिया JMM  प्रखंड अध्यक्ष से भी गुहार लगा चुके हैं. लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ.मूलभूत समस्याओं को लेकर ट्विटर के माध्यम से 05 अक्तूबर 2020 को भी ट्वीट किया गया है. मूलभूत समस्याओं का समाधान नहीं होने पर ग्रामीण काफी नाराज और आक्रोशित है.

हम गरीबों की कोई नहीं सुनता  

ग्रामीणों का कहना है कि हम गरीबों की कोई नहीं सुनता है. हम ग्रामीण हर चुनाव में वोट देते आये हैं. लेकिन हमारी मूलभूत समस्याओं का समाधान कोई नहीं करता है. चुनाव के समय सभी उम्मीदवार समस्या का समाधान करने की बात कहकर चले जाते हैं. वे दोबारा फिर लौटकर गांव में नहीं आते हैं. इसलिए हम सबों ने निर्णय लिया है कि यदि गांव की उक्त समस्याओं का समाधान अविलंब नहीं किया जाता है तो आगामी चुनाव का बहिष्कार करेंगे. चुनाव प्रक्रिया से खुद को दूर रखेंगे. साथ किसी भी जनप्रतिनिधि को गांव में प्रवेश करने नहीं देंगे.

ग्रामीणों ने समस्याओं पर किया मंथन

ग्रामवासियों ने गांव की विभिन्न समस्याओं पर बारीकी से चिंतन-मंथन किया. इस दौरान राजेश हेंब्रम, लखीश्वर हेंब्रम, बाबूलाल हेंब्रम, हेमलाल हेंब्रम, राजेश पुजहर, सोनालाल हांसदा, बुदिनाथ हेंब्रम, मालती, सरिता, शांति, नीरज, गणेश, बड़ामाली, हरिनाथ, पतरास, मोतीलाल, मानिक, फुलमुनी देवी, माधुरी, रौशनी देवी, सुनीता,पिंकी, सादेश्वरी देवी