यूनेस्को ने 2022-2032 तक "विश्व आदिवासी भाषा दशक " घोषित किया

सोनारी-टीसीसी में शुक्रवार फेडरेशन ऑफ़ इण्डियन इंडिजेनस लैंग्वेजेज तथा टाटा स्टील फाउंडेशन के द्वारा एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया.

यूनेस्को ने 2022-2032 तक "विश्व आदिवासी भाषा दशक " घोषित किया

जमशेदपुर: सोनारी-टीसीसी में शुक्रवार फेडरेशन ऑफ़ इण्डियन इंडिजेनस लैंग्वेजेज तथा टाटा स्टील फाउंडेशन के  द्वारा एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया. सेमीनार के प्रारम्भ में संताली के ख्याति प्राप्त साहित्यकार स्व. जादूमनी बेसरा स्मृति में 2 मिनट का मौन रखकर शोक व्यक्त किया गया. सेमिनार के उदघाटन सत्र में  जाहेरथान कमेटी के अध्यक्ष सीआर माझी, साहित्य अकादमी संताली सलाहकार समिति के संयोजक मदन मोहन सोरेन(उडीसा), फील के संयोजक डा. वासवी कीड़ो, भिलोरी भाषा के साहित्यकार वाहरू सोनवणे(महाराष्ट्र), कोकबराक साहित्य के प्रमुख विकास देबबर्मा (त्रिपुरा), कुसुम ताई आलम (गढ़ चिरौली, महाराष्ट्र) तथा टाटा स्टील फाउंडेशन के रामचन्द्र टुडू ने संयुक्त रूप से किया।

अतिथियों ने बारीकी से अपनी बातों को रखा
सम्मेलन के प्रथम सत्र में मदन मोहन सोरेन(उडीसा), डा. वासवी कीड़ो, भिलोरी भाषा के साहित्यकार वाहरू सोनवणे(महाराष्ट्र), कोकबराक साहित्य के प्रमुख बिकास देबबर्मा (त्रिपुरा), कुसुम ताई आलम तथा सीआर माझी  (संताली) ने अपना वक्तव्य दिया।

विभिन्न भाषा के प्रतिनिधियों ने बहुमूल्य विचार दिये

सम्मेलन का द्वितीय सत्र तथा खुला सत्र में उपस्थित विभिन्न भाषा के प्रतिनिधियों ने अपना विचार व्यक्त किया, जिसमें मुख्य है- सिद्धेस्वर सरदार (भूमिज), डेमका सोय, माणिक हांसदा आदि। कार्यक्रम का संचालन ऑल इण्डिया संताली राइटर्स एसोसिएशन के महासचिव श्री रबिन्द्र नाथ मुर्मू ने किया। सम्मेलन का अंत में मदन मोहन सोरेन(उडीसा), डा. वासवी कीड़ो, वाहरू सोनवणे(महाराष्ट्र), बिकास देबबर्मा (त्रिपुरा), कुसुम ताई आलम तथा सीआर माझी ने प्रेस को सम्बोधित किया।

ये प्रस्ताव पारित किये गये

  1. आज यूनेस्को द्वारा घोषित "विश्व आदिवासी भाषा दशक 2022-2032" को समारोह पूर्वक मनाए जाने का फेडरेशन ऑफ़ इण्डियन इंडिजेनस लैंग्वेजेज के ओर से घोषणा किया गया।
  2. आदिवासी भाषाओं का भारत में विकास के लिए राष्ट्रीय परिषद का गठन राष्ट्रीय सिंधी भाषा विकास परिषद जिसका स्थापना वर्ष 1984 एवं 1986 किया गया है के तर्ज पर किया जाय।
  3.  झारखण्ड में संताली भाषा तथा अन्य आदिवासी भाषा का विकास के लिए "झारखण्ड संताली साहित्य अकादमी" तथा  "झारखंड आदिवासी साहित्य अकादमी का गठन किया जाय।
  4. यूनेस्को द्वारा घोषित "आदिवासी भाषा दशक 2022- 2032" को ध्यान रखते हुए सारा भारत में राष्ट्रीय स्तर का "आदिवासी साहित्य समारोह" का आयोजन किया जाय।  
  5. भारत सरकार के द्वारा आदिवासी भाषा के सभी विधाओं में पुस्तकों का मुद्रण कराया जाय।6. भारत सरकार द्वारा राजधानी दिल्ली में "राष्ट्रीय आदिवासी अकादमी" का गठन किया जाय।

कार्यक्रम में ये थे मौजूद

इस कार्यक्रम में 82 लोग सम्मिलित हुए. इसमें हो भाषा के डोबरो बुरीउली, काशराय कूडादा (चाईबासा), डेमका सोय, भूमिज भाषा से सुदर्शन भूमिज, हरीश चन्द्र सिंह, सिद्धेस्वर सरदार, जयपाल सिंह सरदार , मंगला सरदार, संताली भाषा से जोबा मुर्मू, ललिता टुडू, लूसी टुडू, देवगी मुर्मू, लखिया टुडू, डोमन टुडू, सलखान मुर्मू,  मिर्जा मुर्मू, कुशाल चंद्र मुर्मू, कुशा टुडू, कमल लोचन मार्डी, कुंवर माहली, दशरथ हांसदा, लखन माझी, ततन मार्डी, मनी सोरेन, माणिक हांसदा, सुधीर चन्द्र मुर्मू, भीली भाषा के संतोष पावरे तथा मुण्डा भाषा के नियरन हेरेंज आदि उपस्थित थे।